Tuesday

जिंदगी

 
 
तुम्हे लिखने को कुछ वजह चाहिए,
और हमारे बीच कुछ भी ऐसा नहीं जो बेवजह हो
तो फिर हमारे बीच ऐसा क्या है जो वजह बने
और तुम मुझे लिखो और मै तुम्हे लिखू
हां याद है एक वजह जब मै बहुत उदास थी ,
तुम्हारी वजह से मुस्कुराई .
शायद मेरे होठो पर उस मुस्कुराहट के बाद एक उधार बाकी है
बस चुकता करने कि वजह हमेशा ढूंढती हूं
और फिर बिना किसी वजह के लिखती चली जाती हू तुम्हें

1 comment:

Arvind Chaudhari said...

बिना किसी वजह के लिखती चली जाती हू तुम्हें...

----क्या बात है प्रवीणा जी !
बहुत खूब...