Sunday

मेरे पापा नाराज हैं...

मेरे पापा मुझसे नाराज हैं 

उसके पीछे बस एक राज है 

कह रहे हैं

कुछ लिखो तो मुझे तुमपे नाज है 

तुमने मदर्स डे पर कुछ लिखा 

तो फादर्स डे भी आज है 

मैंने कहा, पापा, कविता लिखना तो मेरे 

दिल की आवाज है 

जब चाहे कर लो, ये क्‍या ऐसी खाज है 

पापा बोले, 'ऐसा नहीं है तुम मां के लिए लिखो 

तो मानो कि पिता में भी कुछ बात है'

मैंने कहा, पापा बात तो सही है, 

एक मां सौ पिता से भी खास है

सो फादर्स डे पर मेरे पापा नाराज हैं 

मुझे लगता है, 

पापा में हीमैन, बैटमैन, सुपरमैन सी बात है

कविता न भी लिखूं तो भी 

उनकी हजारों कहानियां मुझे याद है 

मां की तरह पापा भी तो खास हैं... 

2 comments:

उम्मेद said...

बेहतरीन प्रस्तुति....पिता तो हजारों कहानियों में छुपा है......सुन्दर रचना बधाई।

संजय भास्कर said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है