Sunday

मातृत्‍व दिवस की सभी को शुभकामनाएं

कल न्‍यूजपेपर से पता चला कि

कल मदर्स डे है

मैंने सोचा सभी लिखेंगे मैं भी लिखूं

किसी दिवस विशेष पर

मेरी भावनाएं जाने क्‍यों गायब हो जाती हैं

अभी लिखने को मेरे पास कुछ भी नहीं

पर सोचा आज तो सभी जमकर लिखेंगे

सो मैं भी लिखूं

जहां तक दिवस विशेष मनाने की बात है

मैं तो सिर्फ मूर्ख दिवस मनाती हूं

वह भी एक अप्रेल को कहां याद रहता है

सो 27 नवम्‍बर को मनाती हूं

दिवस मनाना है कभी भी मना लो

शादी की सालगिरह को मूर्ख दिवस बना लो

पर आज तो मातृत्‍व दिवस है

सभी लिखेंगे तो क्‍यों ने मैं भी लिखूं

आज तो गंभीर होना पड़ेगा

सभी की मां का सवाल है

सो भाव विहृल होना पड़ेगा

मेरी भावनाएं उन बुजुर्ग की

भावनाओं से शायद जाग जाए

आज के दिन उन्‍हीं को याद करती हूं

एक बार मेरे पड़ोस में शोक सभा थी

कई बुजुर्ग बैठे बातें कर रहे थे

मरने वाले की कम आस-पड़ोस की ज्‍यादा

बात कर रहे थे

अस्‍सी साल के एक बुजुर्ग अचानक

मां के लिए इतना भाव विहृल होने लगे

अपनी मां को दुनिया में सर्वश्रेष्‍ठ बताने लगे

कह रहे थे ''मेरी मां जैसी दुनिया में मां नहीं''

उसने बहुत कष्‍ट झेलकर मुझे पाला पोसा

कभी उफ तक नहीं करी थी

यार मेरी मां जिंदा होती तो

बात ही क्‍या होती

बात बहुत साधारण थी मगर

मेरे लिए अस्‍सी साल के बुजुर्ग को

बच्‍चे की तरह मां-मां करते देखना

असाधारण बात थी

नाती, पोते की उम्र वाले को भी मां की जरूरत थी

तब मुझे खुद के युवा होने पर बड़ी कोफ्त आई।

क्‍योंकि इसी उम्र में हम अपनी मां से दूर होते हैं

बचपन में मां साये में और बुढ़ापा मां की याद में गुजारते हैं

यह सोचकर मुझे झुरीझुरी आ गई

अंदर आकर देखा मेरी सास

लेटी हुई भजन गा रही थी

जाने क्‍या सोचकर मैं सास के पास गई

और एक अच्‍छी सी पप्‍पी ले ली

सास पहले तो आश्‍चर्यचकित हो

फटी आंखों से देखती रही

फिर जाने जैसे समझ गई, मुस्‍कुराई

और इत्‍मीनान से सो गई

वैसा ही कुछ मैंने अपनी मां के साथ किया

अच्‍छी सी पप्‍पी के बदले प्‍यारा सा तोहफा लिया

अब चूंकि आप तो सभी लिखेंगे

सो मैंने भी लिख दिया

सो मौका न चूकिए

आप भी अपनी मां से ऐसा ही प्‍यार जताइए

बदले में अपने लिए ढेर सारा प्‍यार पाइए

10 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

:)

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

आपको भी मातृत्‍व दिवस की शुभकामनाएं.

असलम ख़ान said...

मां तुझे सलाम

सुनील दत्त said...

जो मां से सच्छा प्यार नहीं कर सकता भला वो किसी और से क्या प्यार करेगा
उतम कविता

nilesh mathur said...

प्रवीणा जी, कमाल का लिखा है, सबसे हटकर, भावविभोर कर देने वाली रचना है, बहुत सुन्दर! शुभकामना!

विनोद कुमार पांडेय said...

मातृ दिवस की हार्दिक बधाई..बहुत बढ़िया भाव...प्रस्तुति अच्छी लगी..धन्यवाद

Hindiblog Jagat said...

बधाई.
अच्छा लिखा है आपने.
क्या हिंदी ब्लौगिंग के लिए कोई नीति बनानी चाहिए? देखिए

फ़िरदौस ख़ान said...

मां तुझे सलाम...

HEY PRABHU YEH TERA PATH said...

मातृ दिवस की हार्दिक बधाई

राकेश कौशिक said...

मौका न चूकिए
आप भी अपनी मां से ऐसा ही प्‍यार जताइए
बदले में अपने लिए ढेर सारा प्‍यार पाइए
सही और अच्छी सीख