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सत्य मेव जयते


 आमिर खान साहब का नया प्रोग्राम ...टी वी पर देखा अच्छा लगा , प्रयोग नया नहीं है पर लग रहा है नया क्योकि उसमे आमिर है , हम भी आमिर के फेन है कॉलेज के जमाने से , घर आते समय सडको पर जाने कितने आमिर के साथ रेस लगाई है याद ही नहीं ...बहुत बार इन्हें  घर का पता ना मिल जाए इसलिए जबरदस्ती हार  का मुह भी देखना पड़ता , समय के साथ आमिर ने सोच बदली और हमने भी ..." रंग गए बासंती रंग में इडियट की तरह":) ...छिछोरापन उम्र तक ही दिखता है तो  अच्छा लगता है , उसके बाद कुछ तो नया आवरण लग जाना ही चाहिए उसी आधार पर " छवि " बनती है . छवि बनाने के लिए फिक्स्ड प्रोग्राम  पहले से तय हो तो ठीक रहता है उसके लिए आजकल अनुकूल परिस्तिथियों का इन्तजार नहीं करना पड़ता ..वो तो आपका माईंड सेट अप कैसा है उसअनुसार बन जाएगा .
   ईशवर का धन्यवाद की आमिर में वही छवि  सेटअप तय करने की बुद्धि भी हैं और तरीका भी , वास्तविक भावनाए क्या है यह हम ना ही खोजे तो बेहतर ...बस भय इस बात का है छवि बनती रहे और बन जाए ...जो थोड़ी भी गडबड हुई तो भावनाए बाहर आ जायेगी ...भगवान ना करे ऐसा हो ..अन्यथा फिर से कई लोगो के  दिल टूट जायेंगे . वैसे एक अभिनेता इतना भी करता है तो उसे दिल से धन्यवाद ...मगर इतना करते करते कई बार जब जनता उसे " मसीहा " की छवि में बाँधने लगती है तो अभिनेता के साथ गडबड हो जाती है उसे समझ में नहीं आता वह अब मसीहा बने या अभिता बना रहे ...

 आमिर की युवा सोच सबसे पहले " रंग दे बसंती" से सामने आई ... भारत में हर पीढ़ी एक उम्र तक अपने देश के लिए नयी सोच और जोश को महसूस करती है उम्र ढलने के साथ वह सब ठंडा पड़ जाता है , वही अकुलाहट इस फिल्म में देखने को मिली हर युवा ने इसे अपने अंदर तक महसूस किया और शायद दुबारा ऐसी फिल्म आने वाले दशक में भी ना देखने को मिले
इसके आलावा" तारे जमी पर "उतारने का नया प्रयोग भी सफल रहा , और थ्री इडियट ने तो तहलका ही मचा दिया , इन सभी फिल्मो में हमारी वर्तमान शिक्षा पद्धति को लेकर नयी युवा सोच को बढ़ावा दिया , इस चक्कर में हम जैसे कई ऐसे भावना में बहे कि अपने साथ के "इडियट" को लगे खोजने ,कई मिले भी , पता चला सभी" अपना खाते अपना पीते "है ..यानी .सामाजिक सोच और देश के लिए जोशीली भावना को लिए हमें अब अकेले ही जुगाली करनी पड़ेगी सोच कर अफ़सोस हुआ .

अब देखा आमिर जी नया जयघोष ला रहे है .सत्य मेव जयते ..किस पर कितना प्रभाव पड़ेगा समय बताएगा , ,राजस्थान में  कन्या भ्रूण  , अशिक्षा , बाल विवाह , घरेलु हिंसा जैसी अराजकताओ का सामना तब से करता  आ रहा है जब से यहाँ कि पानी और वनस्पति कम  के साथ तापमान कि अधिकता है ... हम कितना लिखेंगे , कितने बोलेंगे पता नहीं पर ध्यान खींचना भी कुछ जागृत होने जैसा ही महसूस करवाएगा
ऐसी उम्मीद है .




1 comment:

उपासना सियाग said...

आमिर खान का प्रयास बहुत अच्छा लगा मुझे और ये धारावाहिक भी समाज को आईना दिखाता लगा , ये सीरियल बहुत चलेगा ........और जब अभिनेता कोई उत्पाद बेचता है तो उसकी बिक्री होती ही है फिर ये धारावाहिक तो समाज के जागरण की बात करता है तो लोग क्यूँ नहीं जागेंगे .......